गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ जहां आमतौर पर फ्रिज और मिट्टी से बने देसी “फ्रिज” यानी घड़ों की बिक्री में तेजी आती है,वहीं इस बार मौसम के बदले मिजाज ने बाजार की रफ्तार धीमी कर दी है। लगातार हो रही बारिश और अपेक्षित गर्मी न पड़ने के कारण मिट्टी के बर्तनों की मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है।आमतौर पर गर्मी के दिनों में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग ठंडा पानी पीने के लिए मिट्टी के घड़े और सुराही का इस्तेमाल करते हैं। इससे कुम्हार समाज के लोगों को अच्छी आमदनी होती है। लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

देवघर के बरमसिया स्थित मिट्टी के बाजार में इन दिनों पूरी तरह मंदी का माहौल है। कारीगरों ने ठंड खत्म होने से पहले ही बड़ी मात्रा में घड़े और सुराही तैयार कर स्टॉक कर लिया था, ताकि गर्मी के सीजन में उन्हें अच्छे दाम मिल सकें। शुरुआत में कुछ दिनों की गर्मी से बाजार ने रफ्तार पकड़ी भी, लेकिन अचानक हुई बारिश ने बिक्री को बुरी तरह प्रभावित कर दिया।
जानिए क्या हैं कीमत
बाजार में इस समय बंगाल की बनी सुराही 400 से 500 रुपये तक बिक रही है। वहीं अच्छे क्वालिटी का घड़ा लगभग 120 रुपये में उपलब्ध है, जबकि सामान्य घड़ा 80 रुपये तक में मिल रहा है। कीमतें स्थिर रहने के बावजूद मांग में कमी ने कारीगरों की चिंता बढ़ा दी है।
कारीगरों की चिंता बढ़ी
स्थानीय कुम्हारों का कहना है कि अगर जल्द ही मौसम में बदलाव नहीं हुआ और गर्मी नहीं बढ़ी, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका पूरा व्यवसाय मौसम पर निर्भर करता है, और इस बार की अनिश्चितता ने उनकी आर्थिक स्थिति पर असर डालना शुरू कर दिया है।





