शराब और सिगरेट की आदत छूटने पर शरीर खुद अपने अंगों को रिपेयर करने लगता है। शरीर का स्व-प्रतिरक्षा तंत्र इतना अच्छा है कि बुरी लत छूटते ही यह अपने डैमेज हुए अंगों को खुद-ब-खुद ठीक करने लगता है। और देखते ही देखते आने वाले कुछ दिनों और महीनों में शरीर न केवल स्वस्थ बल्कि सुंदर भी दिखने लगता है। साथ ही अंगों यानी ऑर्गेन्स के काम करने की प्रक्रिया नॉर्मल हो जाती है।

शराब और सिगरेट की बुरी लत से शरीर के अंगों को जो नुकसान हुआ है, उसे शरीर खुद से रिपेयर करने लगता है। लेकिन अगर आप नशा नहीं छोड़ पा रहे हैं तो ऐसे में धीरे-धीरे आपका शरीर और इसके पार्ट्स यानी ऑर्गन जर्जर होने लगते हैं और लंग्स, लिवर और किडनी से जुड़ी कई समस्याएं एक साथ घेर लेती हैं।
हैरी पॉटर के हीरो डेनियल रेडक्लिफ की कहानी कुछ ऐसी ही है। डेनियल को 18 साल की उम्र से ही शराब पीने की लत थी। बहुत कम उम्र में सफलता और स्पॉटलाइट में बने रहने के प्रेशर के चलते उन्हें शराब पीने की आदत लग गई। शुरुआती दिनों में उन्हें लगा कि इससे प्रेशर हैंडल करने में मदद मिल रही है। लेकिन शराब की बुरी लत ने धीरे-धीरे उनके शरीर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया।
2010 में डेनियल रेडक्लिफ को इसका एहसास हुआ और उन्होंने शराब और सिगरेट छोड़ दी। इसके बाद वे फिटनेस फ्रीक बन गए। अपने एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने हेल्थ के बारे में बताया कि कैसे शराब और सिगरेट छोड़ने के बाद उनका शरीर रिपेयर हुआ।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 15 साल और उससे ऊपर की उम्र के करीब 125 करोड़ लोगों को तंबाकू की लत है। ये लोग किसी न किसी फॉर्म में तंबाकू का सेवन करते हैं। वहीं करीब 40 करोड़ लोगों को शराब पीने की लत है, जिससे हर साल 26 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। जबकि तंबाकू की लत की वजह से हर साल करीब 80 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
शराब और तंबाकू की लत से लीवर पर पड़ने वाला प्रभाव
जब शरीर बार-बार तनाव से गुजरता है, चाहे वह मानसिक हो या भावनात्मक, तो अक्सर शराब पीने या धूम्रपान करने की इच्छा बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि तनाव मस्तिष्क के सामान्य मार्गों को बदल देता है, जिससे निकोटीन और शराब पर निर्भरता बढ़ जाती है।
जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन के अनुसार लंबे समय तक रहने वाला तनाव तंबाकू और शराब की लत में दोबारा फंसने की संभावना बढ़ा देता है। इस संबंध के पीछे का सटीक कारण यह है कि लंबे समय तक चलने वाले तनाव के दौरान मस्तिष्क ठीक से अनुकूलन नहीं कर पाता। इसके बाद व्यक्ति में कम्पल्सिव यूज़ विकसित हो जाती है और इसका शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
लीवर खुद को कैसे ठीक करता है
लेकिन जब कोई व्यक्ति अपनी रिकवरी के लिए प्रतिबद्ध हो जाता है, जैसे कि डेनियल रैडक्लिफ ने किया, तो शरीर में क्या होता है, खासकर लीवर में, जो सांस के जरिए लिए गए और खाए-पीए गए विषाक्त पदार्थों से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है?
लत का सबसे बड़ा प्रभाव फैटी लीवर का विकसित होना है। यह मेटाबॉलिक तनाव, ऑक्सीडेटिव नुकसान और मस्तिष्क के मार्गों में सूजन के कारण होता है।
तंबाकू में मौजूद टॉक्सिन लीवर पर विषाक्त पदार्थों का बोझ बढ़ा देते हैं, जिससे सूजन होती है और गंभीर मामलों में लीवर को नुकसान पहुंच सकता है। करंट हेपेटोलॉजी रिपोर्ट्स में बताया गया है कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और क्रोनिक लीवर रोग के बीच जटिल संबंध होता है।
वहीं शराब एक हेपाटोटॉक्सिन है, इसलिए इसके सेवन से हानिकारक पदार्थों की पर्याप्त मात्रा शरीर में जाने पर लीवर का कार्य प्रभावित हो जाता है। ऑक्सफोर्ड अकाडेमिया जर्नल के अनुसार शराब पीने की अवधि और उसकी मात्रा दोनों का गंभीर लीवर समस्याओं से सीधा संबंध पाया गया है।
नशा छोड़ने के बाद शरीर में तेजी से दिखते हैं बदलाव
शराब और तंबाकू की लत छोड़ने के बाद शरीर खुद को धीरे-धीरे ठीक करने लगता है। डॉक्टरों के अनुसार नियमित रूप से नशे से दूर रहने पर लीवर, दिल और फेफड़ों में अलग-अलग समयावधि में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।
लीवर पर असर
नशा छोड़ने के सिर्फ 24 घंटे के भीतर लीवर की सूजन कम होने लगती है। इसके बाद लगभग 2 से 4 हफ्तों में लीवर में जमा अतिरिक्त फैट घटने लगता है। हालांकि लीवर का पूरी तरह से स्वस्थ होना व्यक्ति की स्थिति और जीवनशैली पर निर्भर करता है और इसमें कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है, अगर इस दौरान व्यक्ति लगातार स्वस्थ आदतों पर टिका रहे।
दिल और फेफड़ों में सुधार
विशेषज्ञों के मुताबिक धूम्रपान या शराब छोड़ने के 20 मिनट के भीतर ही दिल की धड़कन सामान्य होने लगती है। इसके बाद 2 से 12 हफ्तों के भीतर ब्लड सर्कुलेशन में सुधार देखा जाता है। वहीं 1 से 9 महीनों के अंदर फेफड़ों की कार्य क्षमता बेहतर होने लगती है और उनमें जमा बलगम धीरे-धीरे साफ होने लगता है। लंबे समय तक नशे से दूरी बनाए रखने पर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक साल तक पूरी तरह नशामुक्त रहने पर हृदय रोग का खतरा लगभग 50 प्रतिशत तक घट सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी बनाए रखने से शरीर की रिकवरी प्रक्रिया और तेज हो सकती है।





