CEO ने की जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक SIR प्रक्रिया पर किया चर्चा।राज्य में SIR प्रक्रिया की शुरूआत हो रही है । बता दें कि राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य चल रहे मतदाता मैपिंग कार्य की धीमी गति और उसके कारणों पर चर्चा करना था। बैठक के दौरान CEO के. रवि कुमार ने रांची सहित कई जिलों में उन मतदाताओं की मैपिंग की धीमी गति पर जिला निर्वाचन अधिकारियों के प्रति असंतोष व्यक्त किया जिनकी मैपिंग अभी तक नहीं हुई है और इसके संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए।

CEO ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि हाल ही में हुए गहन पुनरीक्षण की सूचियों के आधार पर मतदाताओं की मैपिंग का कार्य पूरे राज्य में 15 जून तक पूरा कर लिया जाए। जिन मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है। उन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि यदि कोई मतदाता मैपिंग से छूट जाता है तो उसका नाम मतदाता सूची के मसौदे से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे मतदाताओं को SIR प्रक्रिया के दौरान ERO से नोटिस मिलने पर अपनी जन्म तिथि सत्यापित करने वाले दस्तावेज जमा करने होंगें विशेष रूप से वे दस्तावेज जो स्वयं उनसे उनकी माता, उनके पिता अथवा उनके दादा-दादी/नाना-नानी से संबंधित हों। ERO द्वारा दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
CEO ने कहा कि राज्य में निर्धारित SIR की तैयारियों के संबंध में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ ‘इलेक्शन हाउस’ से ऑनलाइन आयोजित समीक्षा बैठक के बाद ETV भारत से बात करते हुए CEO के.रवि कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में मतदाता मैपिंग की गति धीमी रही है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्य अधिक व्यापक स्तर पर हुआ है। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 76% मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है।
बता दें कि बैठक में इससे पहले अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए, CEO ने मैपिंग कार्य की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाताओं की मैपिंग गलत तरीके से की जाती है, तो वे एक ऐसी सूची में शामिल हो जाएंगे जिसे “विसंगति वाले मामले” (Anomaly Cases) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। ऐसे मामलों के लिए ERO को सुनवाई करनी होगी और उचित आदेश जारी करने होंगे। इन मतदाताओं को भी, ठीक वैसे ही जैसे अनमैप्ड मतदाताओं को, SIR प्रक्रिया से गुजरना होगा।
CEO ने अधिकारियों को आगे यह भी निर्देश दिया कि वे अनमैप्ड मतदाताओं की सूची में शामिल प्रत्येक व्यक्ति से संपर्क स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करें। इसके अलावा, इस सूची में उन्हें उन मतदाताओं की पहचान करनी होगी और उन्हें वर्गीकृत करना होगा जो अनुपस्थित,स्थानांतरित, मृत,डुप्लीकेट,या गैर-नागरिक श्रेणियों के अंतर्गत आते है। के.रवि कुमार ने कहा कि SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि SIR प्रक्रिया सख्ती से केवल पात्र भारतीय नागरिकों तक ही सीमित रहे,और उन्हें यह भी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए कि कोई भी गैर-भारतीय इस प्रक्रिया में शामिल न हो सके।
समीक्षा सत्र के दौरान, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को एक PowerPoint प्रस्तुति के माध्यम से मैपिंग प्रक्रिया, SIR प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में बिंदुवार जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने मतदाता सूची से संबंधित चल रही मैपिंग गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा भी की। उन्होंने निर्देश दिया कि बूथ स्तरीय अधिकारियों के नाम और संपर्क नंबर गणना प्रपत्रों में शामिल किए जाएं। उन्होंने आगे निर्देश दिया कि 15 जून के बाद BLOs के कार्यो में कोई बदलाव न किया जाए।
समीक्षा के दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उन BLOs के साथ बातचीत की जिन्होंने मैपिंग के कम आंकड़े दर्ज किए थे; कम प्रदर्शन के कारणों का विश्लेषण करने के बाद, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन BLOs के लिए आवश्यक क्षमता-निर्माण (capacity-building) के उपाय करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी जिलों में 15 जून तक फॉर्म 6,7 और 8 के बैकलॉग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए यानी लंबित मामलों की संख्या शून्य कर दी जाए।
समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुबोध कुमार, प्रशिक्षण नोडल अधिकारी देव दास दत्ता, उप निर्वाचन अधिकारी धीरज कुमार ठाकुर और उप-निर्वाचन अधिकारी सुनील कुमार उपस्थित थे। उनके साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी और उप निर्वाचन अधिकारी भी जुड़े हुए थे।
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