झारखंड की राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश, भीगते तंबू, कीचड़ और तमाम परेशानियों के बावजूद छात्रों का हौसला डिगा नहीं है। झारखंड की राजधानी में JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली के विरोध में जारी छात्र आंदोलन आज बारहवें दिन में प्रवेश कर चुका है। हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं और साफ संदेश दे रहे हैं कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय चाहते हैं।

आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्र इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के आयोजकों ने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राजनीतिक दल को मंच साझा करने की अनुमति नहीं होगी। आंदोलन के दौरान संसदीय और मर्यादित भाषा के प्रयोग, किसी भी प्रकार की अभद्र टिप्पणी से बचने तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए कई आचार-संहिता (कोड ऑफ कंडक्ट) भी तय किए गए हैं। यही वजह है कि आंदोलन लगातार शांतिपूर्ण और संगठित रूप में आगे बढ़ रहा है।
इसी बीच गुरुवार को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। वहीं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की ओर से भी आंदोलन को लगातार समर्थन मिल रहा है।
हालांकि दिन का सबसे चर्चित घटनाक्रम तब सामने आया जब कांग्रेस के कुछ नेता छात्रों का समर्थन करने धरनास्थल पहुंचे। छात्रों ने उन्हें मंच पर आने की अनुमति नहीं दी और “गो बैक कांग्रेस” के नारे लगाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल का मंच नहीं है और इसे राजनीतिक रंग देने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छात्रों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य का है। वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में देरी, विवाद, पारदर्शिता पर सवाल और अनिश्चितता ने युवाओं के धैर्य की परीक्षा ली है। अब छात्र चाहते हैं कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाए।
बारिश के बीच धरनास्थल पर डटे छात्रों का उत्साह यह संकेत दे रहा है कि यह आंदोलन केवल कुछ मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था में सुधार और युवाओं के विश्वास की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है, इस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।
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