कल यानी 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होने जा रहा है। जिसे इस बार की सियासत का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। पहले चरण में 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे जिसमें करीब 3.6 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चरण में 1478 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। पहले चरण के लिए 44 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

पहले चरण में मुकाबला मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है, जबकि कांग्रेस और वाम दल भी कई सीटों पर चुनौती पेश कर रहे हैं। नंदीग्राम, दार्जिलिंग, पुरुलिया, बांकुरा और मिदनापुर जैसे इलाके इस चरण में खास फोकस में हैं, जहां राजनीतिक टकराव सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है।
यह चरण इसलिए भी खास है क्योंकि यही शुरुआती रुझान तय करेगा कि राज्य में सत्ता की लड़ाई किस दिशा में जा रही है। सभी दलों ने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाते हुए पूरी ताकत झोंक दी है।
हालांकि इस बार चुनाव पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने का भी असर दिख सकता है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत राज्यभर में करीब 91 लाख नाम हटाए गए हैं जिससे लाखों मतदाता वोट डालने से वंचित रह सकते हैं। पहले चरण की सीटों के लिए मतदाता सूची पहले ही फ्रीज हो चुकी है। ऐसे में जिनका नाम सूची में नहीं है वे मतदान नहीं कर पाएंगे।
पहले चरण में उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल और जंगलमहल के इलाके में वोटिंग होनी है। प्रमुख प्रत्याशियों की बात करें तो नंदीग्राम विधानसभा से बीजेपी के प्रत्याशी शुभेदूं अधिकारी का मुकाबला टीएमसी के प्रत्याशी पवित्र के साथ है। आसनसोल दक्षिण में बीजेपी के प्रत्यासी अग्रिमित्रा पॉल का मुकाबला टीएमसी के तापस बनर्जी से है। वहीं खड़गपुर में बीजेपी के दिलीप घोष का मुकाबला टीएमसी के प्रदीप सरकार से है। बहरामपुर में कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का मुकाबला बीजेपी के सुब्रत मइजा के साथ है। माथाभांगा में बीजेपी के निशिक प्रमाणिक का मुकाबला टीएमसी के साब्लु बर्मण के साथ है। रायगंज सीट पर बीजेपी के कौशिक चौधरी का मुकाबला टीएमसी के कृष्णा कल्याणी के साथ है। और मालदा में बीजेपी के गोपाल चंद्र साहा का मुकाबला टीएमसी से लिपिका बर्मण घोष के साथ है
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कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच यह मतदान होगा। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और हर बूथ पर निगरानी रखी जाएगी ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। पहले चरण के साथ ही पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई की असली तस्वीर उभरनी शुरू हो जाएगी जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।





