पश्चिम बंगाल में चुनावी जंग अब सिर्फ मुद्दों और भाषणों तक सीमित नहीं रही। बल्कि ये खाने के टेबल तक पहुंच चुकी है। अब तस्वीरों के जरिए भी सियासी नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हो रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र की झालमुड़ी खाते हुए तस्वीर चर्चा में रही। वहीं अब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन की माछ-भात खाते तस्वीर ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है।

झाड़ग्राम से शुरू हुई यह तस्वीरों की राजनीति अब चुनावी हथियार का रूप ले चुकी है। चंपई सोरेन की यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी की सरकार बनने पर मांस, मछली और अंडे पर रोक लग सकती है। इसके जवाब के तौर पर देखी जा रही इस तस्वीर को जिसे चंपाई सोरेन ने खुद साझा करते हुए लिखा है चुनावी प्रचार के बीच माछ-भात का आनंद।
सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और समर्थकों के बीच इसे टीएमसी के आरोपों का जवाब बताया जा रहा है। झाड़ग्राम से लेकर खड़गपुर तक इसको लेकर चर्चा तेज है।
पश्चिम बंगाल में खान-पान केवल भोजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
माछ-भात यहां की जीवनशैली में गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में खान-पान से जुड़े किसी भी मुद्दे का सीधा असर लोगों की भावनाओं पर पड़ता है। यही कारण है कि चुनावी माहौल में यह विषय भी अब रणनीति का हिस्सा बन गया है।
इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी जिसके साथ ही चुनावी नतीजे सामने आएंगे। स्पष्ट है कि इस बार बंगाल की राजनीति में स्थानीय संस्कृति और खान-पान भी चुनावी मुद्दा बन चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तस्वीरों के जरिए तैयार किया गया यह नैरेटिव किसे राजनीतिक बढ़त दिलाता है।





