इंडो–नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट के कायाकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹38.64 करोड़ की लागत से टेंडर जारी कर दिया गया है। इसकी जानकरी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ओएसडी प्रिंस कुमार ने दी है।

यह परियोजना सीमावर्ती इलाकों के साथ-साथ चंपारण और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ी सौगात मानी जा रही है।
केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दूबे ने इस पहल पर प्रसन्नता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के साथ-साथ चंपारण में भी तेज़ी से हो रहे विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राम मोहन नायडू और बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट के विकास से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा चंपारण की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट के विस्तार के तहत टर्मिनल भवन और एटीसी टावर सहित आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। हवाई अड्डे के व्यापक विस्तार के लिए करीब 12 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रशासन द्वारा सर्वे और पैमाइश की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिए विकास कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
वाल्मीकिनगर, जिसे बिहार का ‘कश्मीर’ भी कहा जाता है, राज्य के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के कारण देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। एयरपोर्ट के विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार, आवागमन और चिकित्सा सहित अन्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी।
केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दूबे ने उम्मीद जताई कि चंपारण के विकास की यह उड़ान आगे भी इसी तरह जारी रहेगी और क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
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