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जामताड़ा में स्ट्रॉबेरी की खेती कर आत्मनिर्भर बनीं मुसर्रत खातून, स्ट्रॉबेरी दीदी के नाम से हुईं मशहूर

On: April 9, 2026 4:41 PM
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जामताड़ा में स्ट्रॉबेरी की खेती कर आत्मनिर्भर बनीं मुसर्रत खातून, स्ट्रॉबेरी दीदी के नाम से हुईं मशहूर
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JSLPS यानी झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से जुड़कर मुसर्रत खातून ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। इससे उनकी ना केवल कमाई बढ़ी बल्कि इस खेती से प्रदेश में उनका नाम हो गया साथ ही वो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं।

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परिवर्तन के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन कितना जरूरी होता है इसका जीता-जागता उदाहरण बनी हैं नारायणपुर प्रखंड के गोकुला गांव की मुसर्रत खातून। एक समय तक पारंपरिक खेती और गृहस्थी तक सीमित रहने वाली मुसर्रत आज स्ट्रॉबेरी दीदी के नाम से जानी जा रही हैं।

JSLPS से जुड़कर और गुलाब आजीविका सखी मंडल की सदस्य बनने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। JSLPS से मिली ट्रेनिंग और प्रोत्साहन ने उन्हें कुछ अलग करने की प्रेरणा दी। जहां जिले में मुख्य रूप से धान और मकई की खेती होती रही है वहीं मुसर्रत ने जोखिम उठाते हुए स्ट्रॉबेरी जैसी हाई-वैल्यू फसल की खेती शुरू की।

आज उनके खेतों में लहलहाती स्ट्रॉबेरी उनकी मेहनत और लगन की गवाही दे रही है। उनकी इस पहल से उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है। देश में स्ट्रॉबेरी की मांग लगातार बढ़ रही है। स्थानीय बाजार में भी स्ट्रॉबेरी की अच्छी मांग बनी हुई है।

मुसर्रत खातून की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि जामताड़ा जिले के दूसरे किसानों के लिए वो एक प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उनकी प्रेरणा से अब अन्य महिलाएं और किसान भी स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

भारत में स्ट्रॉबेरी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2020-21 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 3,031 हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी की खेती होती थी। जिसमें साल दर साल बढ़ेतरी हो रही है। देश के कुल स्ट्रॉबेरी उत्पादन में महाराष्ट्र पहले नंबर पर आता है। महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में स्ट्रॉबेरी की सबसे ज्यादा खेती की जाती है। स्ट्रॉबेरी की फसल 45-50 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी मांग बड़े शहरों के होटल, कैफे और आइसक्रीम उद्योगों में बहुत अधिक है।

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