Home झारखंड बिहार राजनीति मनोरंजन क्राइम हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

हजारीबग पश्चिम के डीएफओ मौन प्रकाश का जंगलराज, बना रखा है वसूली का पूरा इकोसिस्टम, टोल टैक्स की तरह करवाता है ऑनलाइन वसूली

On: May 23, 2026 9:53 PM
Follow Us:
हजारीबग पश्चिम के डीएफओ मौन प्रकाश का जंगलराज, बना रखा है वसूली का पूरा इकोसिस्टम, टोल टैक्स की तरह करवाता है ऑनलाइन वसूली
---Advertisement---

हजारीबाग के जंगलों से उठता धुआं अब पूरे प्रदेश में फैल चुका है। जी हां हम बात कोयला से उठने वाले धुएं की नहीं बल्कि कोयला लदे ट्रक से जबरन वसूली की कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस वसूली का रिंग मास्टर खुद हजारीबाग पश्चिम के डीएफओ मौन प्रकाश हैं। कोयला लदे ट्रकों से वसूली और वो भी कैश नहीं ऑनलाइन। इसके लिए मौन प्रकाश ने एक पूरा इको सिस्टम तैयार कर रखा है कुछ गुर्गे पाल रखे हैं जिसके जरिए ये अवैध वसूली का खेल खेला जा रहा है।

add

लेकिन हद की बात तो ये है कि पिछले कई दिनों से TV45 लगातार उन आरोपों और शिकायतों को सामने ला रहा है। लेकिन इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। जिसने पूरे सुरक्षा सिस्टम और वन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप इतने गंभीर हैं कि अब यह मामला सिर्फ वन विभाग के एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहकर पूरी व्यवस्था को अपनी आगोश में ले लिया है।

आरोप लगाने वालों का दावा है कि जंगल और कोयला परिवहन की आड़ में एक ऐसा कथित नेटवर्क सक्रिय है जो सरकारी सिस्टम के नाम पर गाड़ियों को रोकता है उसके बाद उसपर दबाव बनाकर वसूली करता है। TV45 भी इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करता है। ये मामला इतना संगीन है कि इसको लेकर पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता सवाल उठा चुके हैं।

आरोपों के केंद्र में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है और वो नाम है “राजाराम”। सूत्रों का दावा है कि कथित तौर पर पूरा नेटवर्क राजाराम के इशारों पर संचालित होता है। राजाराम ने इसके लिए फॉरेस्टर संटू कुमार के साथ ही विकास और शिवम कुमार के साथ एक वसूली तंत्र बना रखा है। फॉरेस्टर गाड़ियों के बारे में जानकारी भेजता है जिसके आधार पर विकास कुमार और शिवम कुमार गड़ियों से वसूली करते है।

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित स्कैनर और डिजिटल भुगतान है। TV45 को जो दस्तावेज मिले हैं उनमें पीयूष इंटरप्राइजेज का नाम सामने आया है। आरोप है कि इसी स्कैनर के जरिए कथित नेटवर्क संचालित हो रहा है और फोन पे जैसे डिजिटल माध्यमों से लेन-देन किया जाता था। यानी अगर जांच एजेंसियां चाहें तो मिनटों में अभियुक्तों तक पहुंचा जा सकता है। अब ये देखने वाली बात होगी कि विधानसभा तक में उठ चुके इस मुद्दे पर कब कार्रवाई होती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment