JHARKHAND के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने नई दिल्ली में आयोजित हो रही जनजाति सांस्कृतिक समागम में भाग लेने जा रहे,सैकड़ों लोगों के जत्थे को टाटानगर रेलवे स्टेशन से रवाना किया. इस जनजाति सांस्कृतिक समागम में आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने दिल्ली रवाना होने से पहले जनजाति सुरक्षा मंच के आयोजन को लेकर मीडिया से बातचीत की उन्होंने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष और इतिहास काफी लंबा रहा है। हमारे पूर्वजों ने अपनी रूढ़ि-परंपरा, जनपद और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लाल किला मैदान में आयोजित जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यक्रम में देश के हर कोने से आदिवासी समाज के लोग जुटेंगे, जहां उनकी संस्कृति, परंपरा और एकता का भव्य समागम देखने को मिलेगा।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस आयोजन से कांग्रेस असहज महसूस कर रही है, जबकि कांग्रेस में भी कई आदिवासी नेता हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा की कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों को कमजोर करने का काम किया है और कर रही है । साथ ही उनका कहना था कि आजादी के बाद आदिवासियों को मिली संवैधानिक सुरक्षा को 1960 में कांग्रेस सरकार ने कमजोर करने का काम किया।
JHARKHAND पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए समय-समय पर कई प्रयास किए गए। 1967 में इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण विधेयक भी लाया गया था, जिस पर 322 सांसदों और 26 राज्यसभा सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने इसे आदिवासियों के लिए एक सुरक्षा कवच तरह बताया ।
चंपई सोरेन ने JMM पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आदिवासी समाज लाखों की संख्या में देश की राजधानी में जुटकर अपनी पीड़ा और अपनी बाते रख रहे है, तो इससे कांग्रेस को आखिर परेशानी क्यों हो रही है।
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