अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड का स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। राज्य की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है और विदेशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी तेज कर दी गई है। अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए हवाई अड्डे पर उन यात्रियों की विशेष स्क्रीनिंग की जाएगी ,जिनकी यात्रा का इतिहास इबोला से प्रभावित देशों से जुड़ा है। यदि कोई संदिग्ध लक्षण पाए जाते है।तो संबंधित व्यक्ति को 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगाऔर उसकी सेहत की लगातार निगरानी की जाएगी।

अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को लेकर मीडिया से बात करते हुए रांची के सिविल सर्जन डॉ.प्रभात कुमार ने बताया कि इबोला वायरस से संबंधित सभी आवश्यक निवारक उपायों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक देश में संक्रमण का कोई भी मरीज नहीं पाए गए है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने इस वायरल बिमारी की पूरी जानकारी देते हुए बताया की ये बीमारी तीन फेज में हो सकती है। जैसे पहले फेज मरीज के सिर में दर्द होगा।फिर उसके बाद दुसरे फेज में मरिज को उल्टी और बार – बार दस्त लग सकती है।
इसका तीसरा सबसे खतरनाक फेज जीसमें मरीज की हालत में एकदम खस्ता हो जाती है।मरिज के उल्टी और बार – बार दस्त के साथ खून की भी उल्टी हो सकती है ।इसमें मरीज को वैंटीलेटर की जरूरत होती है।सर्जन इसकी तुलना कोविड से करते हुए कहा की कोविड बहुत लोगों के हुई थी,लेकिन मृत्यु दर बहुत कम थी । इबोला वायरस में मृत्यु दर को 50 % से अधिक है, पहले दवाईयों की असुविधा के कारण इसकी मृत्यु दर 90%थी लेकिन धीरे –धीरे घट कर 60% हो गया है ।
इस बीच, इबोला वायरस से निपटने की तैयारियों के तहत रांची सदर अस्पताल में दो बेड भी आरक्षित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं लेकिन साथ ही इस बात पर भी जोर दिया है कि सतर्कता और सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।
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