SIR को लेकर Jharkhand में राजनितिक महौल गरमाई।अगले महीने हो सकता है, SIR की औपचारिक शुरुआत।jharkhand में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राज्य की राजनीति गरमा गई है। फिलहाल चुनाव आयोग जिनका डेटा पूरी तरह से मेल नहीं खाता है उन मतदाताओं के सत्यापन पर काम कर रहा है। SIR के इस पहल के तहत उन मतदाताओं की पहचान की जा रही है जिनके रिकॉर्ड मौजूदा चुनावी डेटा से पूरी तरह मेल नहीं खाते तो राज्य में SIR की औपचारिक शुरुआत अगले महीने होनी है।

SIR को लेकर Jharkhand में इस बीच इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी BJP और सत्ताधारी JMM-कांग्रेस गठबंधन के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। BJP का दावा है कि SIR चुनावी सूचियों को साफ करने और फर्जी मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने का काम करेगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया से अवैध घुसपैठियों खासकर बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाने में मदद मिलेगी। BJP इसे चुनावी प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है।
बता दें की झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पार्टी ने इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों पार्टियों का आरोप है कि SIR की तहत साजिश रची जा रही है। जिसका मकसद अल्पसंख्यक गरीब और हाशिए पर पड़े समुदायों के मतदाताओं को चुनावी सूचियों से बाहर करना है।
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में इसी तरह की प्रक्रियाओं के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। उनका दावा है कि झारखंड में भी वैध मतदाताओं को परेशान करने की कोशिशें हो सकती हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से और निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करते हुए की जाएगी और किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन के नहीं हटाया जाएगा।
झारखंड में इस स्थिति को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि SIR को लेकर राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
READ ALSO : पश्चिम बंगाल में CM सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का विस्तार: 22 राज्य मंत्रियों ने लिया शपथ




