श्रावणी मेले (Shravani Mela) से करीब एक माह पहले बाबा बैद्यनाथ मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर पंडा धर्म रक्षिणी सभा ने जिला और मंदिर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रविवार को बाबा मंदिर के सिंह द्वार स्थित सभा के को लेकर मुख्य कार्यालय में (Shravani Mela) को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज, महामंत्री निर्मल कुमार झा और पूजा पद्धति के विद्वान पंडित चिंतामणि कर्म्हे ने मंदिर व्यवस्था, कूपन प्रणाली, कथित वीआईपी प्रवेश, निकास द्वार के चौड़ीकरण और श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर प्रशासन की कार्यशैली पर आपत्ति जताई। Shravani Mela) के उपक्ष्य में आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पिछले दो-तीन माह से जिला और मंदिर प्रशासन मंदिर की व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शनिवार को कूपनधारियों की कतार आजाद चौक से आगे शीतला मंदिर तक पहुंच गई थी।

साथ ही आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासनिक भवन के ऊपरी तल से कुछ कर्मचारियों द्वारा पैसे लेकर करीब पांच हजार लोगों को प्रवेश कराया गया, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने नवपदस्थापित उपायुक्त का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें मंदिर की परंपराओं की पूरी जानकारी नहीं है और अब तक प्रशासन ने पंडा धर्म रक्षिणी सभा से समन्वय स्थापित करने की जरूरत भी नहीं समझी। उन्होंने मुख्यमंत्री से श्रावणी मेला शुरू होने से पहले उनकी अध्यक्षता में श्राइन बोर्ड की बैठक बुलाने तथा हर दो माह पर नियमित बैठक आयोजित कराने की मांग की।
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि पूर्व में जिन उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों ने पंडा धर्म रक्षिणी सभा के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया, उनके कार्यकाल में मेले का सफल संचालन हुआ। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज को नजरअंदाज कर मंदिर का संचालन नहीं किया जा सकता और उसकी विनम्रता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। निकास द्वार के चौड़ीकरण का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि निकास द्वार के समीप नंदी विराजमान हैं तथा बाबा मंदिर की पूजा पद्धति तांत्रिक परंपरा पर आधारित है। ऐसे में धार्मिक परंपराओं और नंदी के मार्ग से छेड़छाड़ उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कई निर्णय श्राइन बोर्ड की बैठक और सभा की सहमति के बिना लिए जा रहे हैं, जबकि बोर्ड का दायित्व नीति निर्धारण करना है और प्रशासन को उन्हीं निर्णयों का क्रियान्वयन करना चाहिए।
पूजा पद्धति के विद्वान पंडित चिंतामणि कर्म्हे ने भी निकास द्वार के चौड़ीकरण का विरोध करते हुए कहा कि इससे हवन स्थल प्रभावित होगा, जो बाबा मंदिर की प्राचीन पूजा परंपरा और धार्मिक विधि-विधान के विपरीत है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले पुरोहित समाज की राय लेना आवश्यक है।
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