झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर सियासी और सामाजिक (Social) माहौल गरमा गया है। एक ओर आदिवासी संगठनों ने इसे लेकर सामाजिक (Social) व्यापक आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन की प्रक्रिया से झारखंड की विधानसभा या लोकसभा सीटों में कोई कमी नहीं होगी।आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों का कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया यदि जनसंख्या के आधार पर की गई तो अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। उनका आरोप है कि इससे आदिवासी क्षेत्रों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा। इसी आशंका को लेकर संगठनों ने राज्यभर में Social तौर पर जनजागरण अभियान चलाने और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए कई जिलों में बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।

दूसरी ओर भाजपा ने विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए कहा है कि परिसीमन का उद्देश्य केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना है, न कि झारखंड की सीटों की संख्या कम करना। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य के हितों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी प्रकार का निर्णय लिया जाएगा।साथ ही उन्होंने दावा करते हुए ये भी कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और अनावश्यक भय का माहौल बनाया जा रहा है।
आपको बता दें कि फिलहाल परिसीमन को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है,और अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और परिसीमन आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिकी हैं। क्यों की अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की चिंताओं के बीच इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।
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