केंद्र सरकार के MMDR संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है। खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में खनिजों पर अतिरिक्त कर और सेस लगाने के अधिकार को लेकर राज्य और केंद्र के बीच बहस का मुद्दा बनता जा रहा है। इस मामले को लेकर झारखंड सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर सकती है।
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने केंद्र सरकार के संशोधन को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि संशोधन के तहत राज्य सरकार मेजर मिनरल पर अतिरिक्त कर नहीं लगा सकती। उन्होंने दावा किया कि झारखंड जैसे खनिज उत्पादक राज्य में इसका असर उद्योग, रोजगार और आम लोगों पर पड़ सकता है।
कोयला और आयरन ओर को लेकर क्या बोले बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के प्रमुख खनिजों में कोयला और आयरन ओर शामिल हैं। कोयले का इस्तेमाल बिजली संयंत्रों में, जबकि आयरन ओर का इस्तेमाल स्टील और दूसरे उद्योगों में किया जाता है।
उन्होंने तर्क दिया कि अगर इन खनिजों की कीमत बढ़ती है तो उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी। इसका असर आगे तैयार होने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, अधिक लागत के कारण उद्योग दूसरे राज्यों या स्रोतों से खनिज खरीदने की ओर भी जा सकते हैं।
कोयले पर 450 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भार का दावा

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में कोयले पर प्रति टन 450 रुपये का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है। उनके मुताबिक, अगर कोई ट्रक 30 टन कोयला लेकर जाता है तो उस पर करीब 13,500 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की अतिरिक्त लागत का सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
आयरन ओर पर 600 रुपये प्रति टन का मुद्दा
आयरन ओर को लेकर भी बाबूलाल मरांडी ने अतिरिक्त आर्थिक भार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आयरन ओर पर 600 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त भार है।
उनके अनुसार, अगर एक ट्रक में 30 टन आयरन ओर जाता है तो करीब 18 हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। उनका कहना है कि इससे झारखंड में खनिज आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है।
उत्पादन लागत कम करने पर दिया जोर
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक उत्पादन लागत कम नहीं होगी, तब तक आम लोगों को सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराना मुश्किल होगा। साथ ही भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों को राहत और रियायत देने की जरूरत है, ताकि उत्पादन बढ़े और रोजगार के अवसर भी बने रहें। उनके मुताबिक, झारखंड के हित में भी खनिज आधारित उद्योगों की लागत को नियंत्रित रखना जरूरी है।
विशेष सत्र को लेकर बढ़ी हलचल
MMDR संशोधन के मुद्दे पर झारखंड सरकार की ओर से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चा के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है तो खनिजों पर अतिरिक्त लेवी, राज्य के राजस्व अधिकार, उद्योगों की लागत और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं।
झारखंड के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में कोयला, लौह अयस्क और खनिज आधारित उद्योगों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में केंद्र और राज्य के अधिकारों से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर और जोर पकड़ सकता है।







