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बलिया ने नम आंखों से दी उमाशंकर सिंह को अंतिम विदाई, जनसैलाब ने बताया जनता के दिलों में कितनी थी जगह

On: August 8, 2026 5:43 PM
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बलिया ने नम आंखों से दी उमाशंकर सिंह को अंतिम विदाई, जनसैलाब ने बताया जनता के दिलों में कितनी थी जगह
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बलिया के रसड़ा की धरती शनिवार को गमगीन नजर आई। बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। जिस जनप्रतिनिधि ने वर्षों तक क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की कोशिश की, उसे अंतिम विदाई देने के लिए आम से लेकर खास तक बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। माहौल में गहरा सन्नाटा था, आंखों में नमी थी और हर तरफ अपने प्रिय नेता को खोने का दर्द दिखाई दे रहा था।

उमाशंकर सिंह का निधन ऐसे समय हुआ, जब वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा, तब रसड़ा सीट से उमाशंकर सिंह ने जीत दर्ज कर पार्टी की विधानसभा में मौजूदगी बनाए रखी। वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक थे।

लेकिन उमाशंकर सिंह की पहचान सिर्फ एक विधायक या राजनीतिक दल के नेता के रूप में नहीं थी। पूर्वांचल की राजनीति में उन्हें एक ऐसे जनप्रतिनिधि के तौर पर देखा गया, जिसने राजनीति के साथ सामाजिक सरोकारों को भी महत्व दिया। जरूरतमंद परिवारों की मदद, सामाजिक कार्यक्रमों और क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में भागीदारी ने उन्हें आम जनता के बीच अलग पहचान दिलाई। उनके सामाजिक कार्यों में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने जैसी पहल भी शामिल रही। कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता की थी।

उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर भी संघर्ष और निरंतर सक्रियता से भरा रहा। वह वर्ष 2011 में बहुजन समाज पार्टी से जुड़े और इसके बाद रसड़ा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते गए। 2017 और फिर 2022 में उन्होंने रसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वर्ष 2022 में उन्होंने उस समय जीत हासिल की, जब प्रदेश में भाजपा की मजबूत राजनीतिक लहर थी। उनकी यह जीत उनके क्षेत्र में प्रभाव और जनता के बीच पकड़ का संकेत मानी गई।

लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे उमाशंकर सिंह की तबीयत पिछले दिनों बिगड़ गई थी। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत प्रदेश के कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। बसपा प्रमुख मायावती ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया और उन्हें पार्टी के प्रति समर्पित नेता बताया।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब उमाशंकर सिंह के राजनीतिक जीवन का शायद सबसे भावुक दृश्य रहा। हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह बता दिया कि किसी नेता की असली विरासत केवल उसके पद या चुनावी जीत से नहीं बनती, बल्कि जनता के साथ उसके रिश्ते से बनती है। रसड़ा की सड़कों पर उमड़ी भीड़ उसी रिश्ते की गवाही दे रही थी।

उनके अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। राजनीतिक सहयोगियों, समर्थकों और आम लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश सिंह भी इस मौके पर भावुक नजर आए और उमाशंकर सिंह के परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

उमाशंकर सिंह का जाना केवल बसपा के लिए एक राजनीतिक क्षति नहीं है, बल्कि रसड़ा और बलिया के उन हजारों लोगों के लिए भी व्यक्तिगत दुख का क्षण है, जिन्होंने उन्हें अपने बीच सक्रिय देखा था। राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, चुनावी समीकरण बदलते रहते हैं, लेकिन जनता के दिल में बनी जगह लंबे समय तक कायम रहती है।

आज उमाशंकर सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जनसेवा, संघर्ष और लोगों से जुड़ाव की यादें उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों के बीच जीवित रहेंगी। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब यही संदेश दे गया कि उन्होंने अपने पीछे सिर्फ एक राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि लोगों के साथ जुड़ी हुई एक भावनात्मक विरासत छोड़ी है।

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