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सरायकेला-खरसावां में एनजीटी प्रतिबंध के बावजूद बालू उठाव के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

On: July 28, 2026 5:40 PM
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एनजीटी प्रतिबंध के बावजूद बालू उठाव के आरोप, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
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सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध बालू खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रतिबंध के बावजूद चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में रात के अंधेरे में स्वर्णरेखा नदी के कुछ घाटों से बालू का उठाव और परिवहन जारी है।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, जारगोड़ी, सोड़ो और वीरडीह घाटों से देर रात से सुबह तक बालू उठाने की गतिविधियां चलने की चर्चा है। लोगों का दावा है कि भारी वाहनों के माध्यम से बालू का परिवहन किया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

मामले में कुछ लोगों ने आदित्यपुर निवासी विवेक झा उर्फ छोटू झा का नाम भी लिया है। हालांकि इन आरोपों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष भी सामने नहीं आया है। एनजीटी के नियमों के अनुसार झारखंड में हर साल 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू के उठाव और खनन पर पूरी तरह रोक रहती है। मानसून के दौरान नदियों के संरक्षण के लिए यह पाबंदी लागू की जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिबंध के बावजूद बालू खनन और परिवहन हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जांच के बाद अवैध खनन के आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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