झारखंड में JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच अब सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह संवाद के जरिए समाधान चाहती है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि छात्रों से बातचीत के लिए कोई अलग कमेटी गठित नहीं की गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आंदोलनकारी छात्र सरकार के साथ वार्ता की पहल कब करते हैं।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक के बाद कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए कोई नई समिति नहीं बनाई है। उन्होंने बताया कि मंत्रियों दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार सोनू, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा के साथ एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को शामिल करते हुए एक समूह बनाया गया है। इस समूह का उद्देश्य आंदोलन की गतिविधियों पर नजर रखना और समन्वय बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से छात्रों तक यह संदेश पहुंचा दिया गया है कि उनके हित में जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा। अब यह छात्रों पर निर्भर करता है कि वे सरकार के साथ बातचीत कब शुरू करना चाहते हैं।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार ने छात्र आंदोलन शुरू होने से पहले ही परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसे लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान संवाद के जरिए ही निकलता है। सरकार चाहती है कि जल्द से जल्द बातचीत शुरू हो, ताकि छात्रों की समस्याओं का सकारात्मक और स्थायी समाधान निकाला जा सके।
इधर, आंदोलनकारी छात्र पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे बंद कमरे में बातचीत के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यह पूरे राज्य के प्रतियोगी छात्रों से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए वार्ता पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की CBI जांच, लंबित भर्तियों का कैलेंडर जारी करना, आयु सीमा में छूट और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
सरकार के ताजा रुख से यह साफ है कि वह संवाद के जरिए गतिरोध खत्म करना चाहती है। वहीं अब पूरा मामला आंदोलनकारी छात्रों के अगले कदम पर निर्भर करता है। यदि छात्र प्रतिनिधिमंडल बनाकर वार्ता के लिए आगे आते हैं तो समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच संभावित बातचीत पर सभी की नजर बनी हुई है।
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