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झारखंड के आंदोलनकारियों ने पेंशन से लेकर पानी, जंगल और जमीन के मुद्दों को उठाया

झारखंड के आंदोलनकारियों ने पेंशन से लेकर पानी, जंगल और जमीन के मुद्दों को उठाया
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30 सितंबर को, झारखंड आंदोलन के कार्यकर्ताओं समेत कई संगठनों ने सरकार को मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कई तरह के मुद्दों को शामिल किया गया है जैसे कार्यकर्ताओं का सम्मान, पहचान और पेंशन से लेकर किसानों, मज़दूरों,  और जंगल और जमीन विस्थापित लोगों और झारखंडी भाषा व संस्कृति के संरक्षण से जुड़ी चिंताएं।
ज्ञापन में झारखंड आंदोलन के कार्यकर्ताओं के लिए राज्य-स्तरीय सम्मान, अलग पहचान और पेंशन की मांग, जंगल और जमीन  की गई है। इसमें कार्यकर्ता के तौर पर मान्यता पाने के लिए जेल जाने की अनिवार्य शर्त को हटाने और उनके बच्चों  और आश्रितों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी मांग की गई है।

शिबू सोरेन के लिए सर्वोच्च सम्मान की मांग
कार्यकर्ताओं ने मांग की कि ‘डिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को राज्य प्रोटोकॉल के अनुसार आंदोलन के कार्यकर्ताओं के लिए आरक्षित सर्वोच्च सम्मान दिया जाए। इसके अलावा, झारखंड आंदोलन कार्यकर्ता पहचान आयोग के कार्यालय के पुनर्गठन की भी मांग की गई।किसानों और विस्थापन के मुद्दे भी उठाए गए

ज्ञापन में किसानों और विस्थापित लोगों से जुड़े मुद्दों पर खास ज़ोर दिया गया है। मुख्य मांगों में ‘लैंड बैंक’ को खत्म करना, प्राकृतिक संसाधनों (पानी, जंगल और ज़मीन) के दोहन को रोकना, *गैर-मजरुआ (सामुदायिक/सरकारी स्वामित्व वाली) ज़मीन के लिए लगान रसीद जारी करना और विस्थापित लोगों को मुआवज़ा देना शामिल है। इसके साथ ही, साल में तीन फसलें उगाने लायक ज़मीन का सर्वे करने, किसानों के लिए ₹10,000 की मासिक पेंशन और सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की मांगें भी उठाई गईं।

भाषा, संस्कृति और रोज़गार पर ध्यान
संगठनों ने झारखंडी भाषा, संस्कृति और मातृभाषाओं के संरक्षण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और साथ ही स्थानीय लोगों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार, रोज़गार के अवसर, खनिज संपदा के प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी मांगें भी शामिल हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मांगें सीधे तौर पर झारखंड की ज़मीन, पानी, जंगल, किसानों, मज़दूरों और खुद आंदोलन की पहचान से जुड़ी हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर होंगी कि सरकार इन मांगों के जवाब में क्या कदम उठाती है। है।

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