बोड़ाम प्रखंड के करीब 18 किमी सड़क भादुडीह सातनाला बोड़ाम भाया माधवपुर बंगाल सीमा तक मुख्य सड़क निर्माण कार्य में जमीन देने वाले रैयत ग्रामीण किसान अपने जमीन के बदले मिलने वाली मुआवजा (compensation) की राशि के लिए दर दर भटक रहे हैं।इस सड़क का निर्माण हुए करीब दस साल पूरा होने को है।लेकिन आज तक compensation की राशि भू अर्जन विभाग से रैयतदारो को नहीं मिली। compensation राशि मिलने का सिर्फ़ आश्वासन ही मिला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में एक बैठक कर उपायुक्त द्वारा दिए गए आश्वासन को समय से पालन नहीं करने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी।

जानकारी देते हुए समाजसेवी फुलचांद सिंह सरदार ने बताया कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के बैनर तले एक आंदोलन की रूप रेखा की जा रही हैं।यदि उपायुक्त के आश्वासन के आधार पर मुआवजा नहीं मिलता हैं तो ग्रामीण रैयत किसान आंदोलन को बाध्य होंगे इस सड़क निर्माण के करीब एक दशक पूर्ण होने के बाद भी करीब 14 सौ 50 रैयत किसानों को नामांकित करने के बाद भी मुआवजा राशि नहीं ।रैयतदारो के द्वारा पंचायत स्तर,मुख्यमंत्री से लेकर लोकसभा स्तर तक मुआवजा की मांग करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों को आवेदन के माध्यम से अवगत करवाया लेकिन अब तक राशि का भुगतान नहीं हुआ। ग्रामीणों की आंखे राशि मिलने की आस में पथरा गयी है।
सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण किसान रैयतदार जिला के उपायुक्त से शुक्रवार को मिलकर मामले से अवगत कराया। उपायुक्त ने मामले को सुनने के बाद दस दिन का समय लिया है।समय अवधि के बाद पुनः मिलकर मामले को समाधान करने की पहल की जाएगी।यदि कोई रास्ता नहीं निकलेगा तो ग्रामीण रैयत किसान आंदोलन जमीनी स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।समाजसेवी सुभाष सहिस बताते हैं कि ग्रामीणों का आंदोलन सड़क से लेकर मुख्यालय तक लगातार जारी है।लेकिन विभाग के पास राशि होने के बाद भी कोई भी जनप्रतिनिधि मुआवजा दिलाने की पहल नहीं कर रहे हैं।
हमारी मांग है कि विभाग मामले को गंभीरता से लेकर समाधान का रास्ता निकाले ताकि रैयतों को मुआवजा राशि जल्द से जल्द भुगतान हो सके। रैयतदार भरत चंद्र मंडल बताते हैं कि कुल 18 किमी सड़क निर्माण के लिए बोड़ाम प्रखंड के 11 मूल गाँव,6 टोला में करीब 1450 रैयत सड़क के लिए जमीन दे चुके हैं ।निर्माण शुरू हुए दस साल जबकि कार्य समाप्ति हुए पांच वर्ष पुरा होने के बाद भी राशि मिलने की आस में भटक रहे हैं।विभाग यदि हमारी मांगो को नहीं मानती है तो जल्द उग्र आंदोलन का बिगुल ग्रामीण रैयत के द्वारा किया जाएगा





