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दूध संकलन और प्रचार को बढ़ावा मिलेगा, गिरिडीह में एक 50,000 लीटर का प्लांट बनाया जा रहा है

दूध संकलन और प्रचार को बढ़ावा मिलेगा, गिरिडीह में एक 50,000 लीटर का प्लांट बनाया जा रहा है
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गिरिडीह जिले में दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में गिरिडीह के योगीटांड़ में निर्माणाधीन डेयरी प्लांट का बुधवार को उपायुक्त रामनिवास यादव ने निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने निर्माणाधीन प्लांट की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता और परियोजना से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसी के प्रतिनिधियों से ली।

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तकनीकी मापदंडों का पूरी तरह पालन किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने और परियोजना से जुड़ी सभी आधारभूत व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने पर भी जोर दिया।3 करोड़ 45 लाख से अधिक की परियोजना दरअसल, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट यानी DMFT मद से वित्तीय वर्ष 2026-27 में गिरिडीह जिले में दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ₹345.41 लाख, यानी करीब 3 करोड़ 45 लाख 41 हजार रुपये की परियोजना प्रस्तावित की गई है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जिले में दूध संग्रहण और विपणन की व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में दूध का उत्पादन करने वाले किसानों को संगठित बाजार उपलब्ध हो सके और उन्हें उनके दूध का बेहतर एवं लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला प्लांट गिरिडीह में प्रस्तावित डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला डेयरी प्लांट है। यह प्लांट राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी NDDB के टर्नकी आधार पर स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में है।

इसके जरिए जिले के ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को संगठित दुग्ध संग्रहण व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। इससे दूध के सुरक्षित और व्यवस्थित संग्रहण के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। झारखंड सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुए समझौते के तहत झारखंड मिल्क फेडरेशन यानी JMF द्वारा संस्थागत दुग्ध संग्रहण तथा मेधा दूध और दुग्ध उत्पादों के विपणन को बढ़ावा दिया जा रहा है।इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों से दूध संग्रहण को मजबूत करने के साथ दूध को बाजार तक पहुंचाने के लिए जरूरी आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है।

इसका सीधा लाभ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध का उत्पादन करने वाले किसानों को मिलने की उम्मीद है। संगठित संग्रहण व्यवस्था विकसित होने से किसानों को अपने दूध के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।निरीक्षण के दौरान उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि जिले में दुग्ध क्षेत्र से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही दुग्ध उत्पादकों के लिए बेहतर अवसर और बाजार उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।

उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करने, गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने और परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
कुल मिलाकर, योगीटांड़ में निर्माणाधीन यह डेयरी प्लांट गिरिडीह के दुग्ध उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में देखा जा रहा है। 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले इस प्लांट के संचालन से जिले में दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
निरीक्षण के दौरान NDDB के DGM श्री के.एस. पटेल, मेधा के महाप्रबंधक श्री पवन मारवाहा सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी, कार्यकारी एजेंसी के प्रतिनिधि और परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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