राज्य सरकार के 99 हजार करोड़ के निवेश दावे पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। री-इन्वेस्टमेंट (re-investment) दिखाकर आंकड़ा बनाने की गई कोशिश की जा रही है। आरोप है कि पुराने समझौतों को ही बार-बार नए निवेश के रूप में पेश किया जा रहा है। दावोस यात्रा में हुए MOU का जिक्र करते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा गया कि उनमें से 80% से ज्यादा निवेश को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में फिर से दोहराया गया और अब री-इन्वेस्टमेंट (re-investment) में गलत आकड़ो को खेल किया जा रहा है,कई निवेश पैकेज को री-इन्वेस्टमेंट (re-investment) दिखाकर एक लाख करोड़ का आंकड़ा बनाने की कोशिश हो रही है।

सबसे बड़ा सवाल जिंदल समूह के साथ 30 हजार करोड़ के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर है। कहा गया कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए केंद्र और कई विभागों से NOC जरूरी है। जिंदल कंपनी लोहा और स्टील के क्षेत्र में तो मजबूत है, लेकिन न्यूक्लियर में उनकी कोई योग्यता नहीं। 2025 के शांति एक्ट के बाद 500 मेगावाट का जिक्र करके पुरानी योजनाओं को नए पैकेज में पेश किया जा रहा है। यह जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। आरोप है कि जमीनी स्तर पर नए उद्योग और रोजगार नहीं दिख रहे, सिर्फ कागजों पर आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार से इस पर स्पष्टता की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री की ओर से किया गया यह बड़ा निवेश राज्य की नीतियों में उनके भरोसे को दिखाता है। ये MoU सिर्फ़ कागज़ी औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक मज़बूत आधार हैं। देश भर से आए नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए, उन्होंने भरोसा दिलाया कि झारखंड न केवल नीतियां बना रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए एक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह सिस्टम भी विकसित कर रहा है। उन्होंने इंडस्ट्री से इस विकास अभियान में साथ आने का आह्वान किया और कहा कि सरकार हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है।रोजगार नहीं दिख रहे, सिर्फ कागजों पर आंकड़े बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार से इस पर स्पष्टता की मांग की गई है।
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