जमशेदपुर के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एमजीएम और सदर अस्पताल में पिछले तीन दिनों के भीतर चार लोगों की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही और गलत दवा देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। जमशेदपुर में लगातार सामने आ रही घटनाओं से मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल है। वहीं इस मुद्दे पर अब सियासत भी तेज हो गई है।

जमशेदपुर के एमजीएम और सदर अस्पताल में इलाज के दौरान हुई चार मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। कहीं डॉक्टर की लापरवाही का आरोप है तो कहीं गलत दवा देने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रही इन घटनाओं से सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके परिजन सहमे हुए हैं। स्थानीय पार्षद राजेश सिंह ने भी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तो बना दिए गए, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह फेल हैं। गरीब परिवार आज कर्ज लेकर इलाज कराने को मजबूर हैं, फिर भी उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहाँ तक की अस्पताल से शव को लेकर जाने के लिए एम्बुलेंस भी नहीं है, मृतक खुद ही अपने परिजनों के शव को गोद ने उठाकर लेकर जाने को मजबूर है।
मामले को लेकर भाजपा विधायक पूर्णिमा साहू ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे चल रहा है और अस्पतालों में लगातार लापरवाही के कारण गरीब लोगों की जान जा रही है। पूर्णिमा साहू ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के दो लोगों की मौत हुई है और परिजनों से मुलाकात में डॉक्टर की लापरवाही तथा गलत दवा देने की बातें सामने आई हैं। पूर्णिमा साहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि केवल जांच के आश्वासन से काम नहीं चलेगा। दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए, अन्यथा वे पीड़ितों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगी।
वहीं झामुमो ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने कहा कि भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए मौत जैसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है और जिला प्रशासन जांच प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। झामुमो का दावा है कि जिले के उपायुक्त स्वयं मामले का संज्ञान ले चुके हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।
बहरहाल सरकारी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही मौतों की घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि आखिर मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज कब मिलेगा और सरकारी अस्पतालों की बदहाली कब दूर होगी।
READ ALSO: Supriyoभट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला: शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली पर उठाया सवाल





