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Bihar के CM बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी लगाया बड़े projects पर मुहर : प्रगती को ओर बढ़ रहा बिहार

On: June 8, 2026 7:34 PM
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Bihar के CM बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी लगाया बड़े projects पर मुहर : प्रगती को ओर बढ़ रहा बिहार
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Bihar के CM बनने के बाद पहली बार सम्राट चौधरी ने Bihar के लिए बड़े – बड़े projects पर मुहर लगाया है, सम्राट चौधरी Bihar को projects धीरे -धीरे प्रगती कार्य के ओर ले जाने की काम  कर रहे है।Bihar सरकार ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेवाओं को बढ़ाने और डिजिटल गवर्नेंस को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। IT की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने projects बनाया जा रही है हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट्स को बेहतर ढंग से मैनेज करने के लिए विभाग ज़िला और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर ऑफ़िस बनाएगा।

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इसके लिए Bihar इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विस रूल्स के तहत कर्मचारियों जिनमें ज़िला ई-गवर्नेंस अधिकारी भी शामिल कर तैनात किया जाएगा। इस कदम से अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, projects की निगरानी बेहतर होगी और सरकारी नीतियों को सही ढंग से लागू किया जा सकेगा।

इसके अलावा, इससे आम लोगों को डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिलेगी और उनकी शिकायतों का तेज़ी से समाधान हो सकेगा। इस प्रस्ताव को बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंज़ूरी दी गई, जिसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। बैठक में कुल 13 प्रस्तावों को मंज़ूरी दी गई। बैठक के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव (कैबिनेट) अरविंद चौधरी ने दरभंगा AIIMS के लिए चुनी गई ज़मीन को पास की नदियों से निकाली गई गाद का इस्तेमाल करके समतल करने के फ़ैसले की घोषणा की।

कैबिनेट ने इस काम के लिए ₹185 करोड़ की projects को मंज़ूरी दी। AIIMS की साइट को समतल करने के लिए खिरोई और बागमती समेत कई नदियों की गाद का इस्तेमाल किया जाएगा। राज्य सरकार ने पहले इस प्रोजेक्ट के लिए ₹309 करोड़ की योजना को मंज़ूरी दी थी, जिसमें से अब ₹185 करोड़ को मंज़ूरी दी गई है।कैबिनेट ने केंद्र द्वारा प्रायोजित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण (PM-FME) योजना को 30 सितंबर, 2028 तक लागू करने के लिए ₹164.51 करोड़ को मंज़ूरी दी।

इस योजना का मकसद राज्य में पैदा होने वाले कृषि और खाद्य उत्पादों की वैल्यू बढ़ाना और आधुनिक, टेक्नोलॉजी पर आधारित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देना है।

बात दें कि इस योजना के  बिहार सरकार ऐसा दवा कर रही है कि व्यक्तिगत उद्यमियों को अपना उद्योग शुरू करने के लिए 35% (अधिकतम ₹10 लाख तक) की कैपिटल सब्सिडी मिलेगी, जबकि समूहों को भी इसी तरह 35% सब्सिडी का फ़ायदा मिलेगा। उद्यमियों को जागरूक करने के लिए ट्रेनिंग और बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।कैबिनेट ने भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते के तहत औरंगाबाद के नबीनगर में एक ITI बनाने को मंज़ूरी दे दी है। यहां 2026-27 एकेडमिक ईयर से पांच ट्रेड में ट्रेनिंग शुरू होगी। इसके लिए 38 पद बनाए गए हैं। कंपनी द्वारा बनाए गए कैंपस और सुविधाओं को राज्य सरकार को बिना किसी खर्च के सौंप दिया जाएगा।

बिहार सरकार ने दादर मौज़ा (मोहनिया ब्लॉक, कैमूर ज़िला) में अधिग्रहित अतिरिक्त सात एकड़ ज़मीन को डेयरी, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विभाग को बिना किसी खर्च के स्थायी और अंतर-विभागीय रूप से ट्रांसफर करने की मंज़ूरी देने का काम किया जाऐगा। इस ज़मीन पर एक डेयरी और दूध उत्पादन प्लांट लगाया जाएगा, जिससे दूध उत्पादन और पशुपालन सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक के दौरान, बक्सर के नवानगर इंडस्ट्रियल एरिया में M/s वरुण बेवरेजेज़ लिमिटेड की बेवरेज मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए वित्तीय प्रोत्साहन को मंज़ूरी दी गई।

लगभग ₹483.51 करोड़ के प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स, जूस-बेस्ड बेवरेजेज़, पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर और बेवरेज सिरप बनाने की सुविधाएं, साथ ही 3-मेगावाट का सोलर पावर जनरेशन यूनिट स्थापित किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट राज्य में इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देगा और 400 कुशल और अकुशल श्रमिकों को सीधा रोज़गार देगा।

कैबिनेट ने बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेज़ी से समाधान सुनिश्चित करने के लिए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अंतर्गत दो-स्तरीय उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच बनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।इसके लिए चीफ इंजीनियर के दो और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर के दो नए पद बनाए जाएंगे।

इस पहल से उपभोक्ता सेवाओं में सुधार होगा और शिकायतों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित होगा। डॉक्टरों को उच्च शिक्षा के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी करने की प्रक्रिया को मंज़ूरी मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग के तहत काम करने वाले बिहार स्वास्थ्य सेवा (सामान्य और विशेषज्ञ) और दंत चिकित्सा सेवा कैडर के डॉक्टरों को उच्च शिक्षा और अन्य तय कामों के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी करने के लिए दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दी गई है। यह सुविधा तय नियमों और शर्तों के आधार पर दी जाएगी।

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