पूरे एक साल में सावन माह के पूर्णिमा के दिन वाला ये रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार सिर्फ भाई – बहन के रिश्तों में प्यार को हि नहीं बढ़ता बल्की, देश के व्यापार क्षेत्र को भी बढ़ता है। इस रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) देश और ज्यादा खुश हो कर अपनी खुशिया मनाएगा। इस साल रक्षाबंधन(Raksha Bandhan) पर पूरे देश में लगभग ₹25,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 45% ज़्यादा है, जबकि गिफ्ट, मिठाइयां, कपड़े और त्योहार से जुड़े दूसरे सामानों को मिलाकर कुल कारोबार ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा हो सकता है।
रक्षाबंधन का त्योहार अब सिर्फ़ भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक नहीं रह गया है, यह ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्वदेशी उत्पादों में बढ़ते भरोसे और राष्ट्रीय भावना का उत्सव बन गया है। देश भर के बाज़ारों में स्वदेशी राखियों की ज़बरदस्त माँग है, और अलग-अलग राज्यों में बनी अनोखी भारतीय राखियाँ ग्राहकों के लिए मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल सेक्रेटरी शंकर ठक्कर ने बताया कि इस साल रक्षाबंधन पर पूरे देश में लगभग ₹25,000 करोड़ के कारोबार का अनुमान है। जो पिछले साल से लगभग 45% ज़्यादा है, जबकि गिफ्ट, मिठाइयाँ, कपड़े और त्योहार से जुड़े दूसरे सामानों को मिलाकर कुल कारोबार ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल देश भर में राखी का कारोबार लगभग ₹17,000 करोड़ था, जबकि 2023 में यह ₹12,000 करोड़ था।
CAIT के अनुसार, इस साल भी देश भर के बाज़ारों में चीनी राखियों की कोई मांग नहीं है।
व्यापारियों और ग्राहकों ने पूरी तरह से स्वदेशी राखियों को अपना लिया है और बाज़ारों में सिर्फ़ भारत में बनी राखियाँ ही उपलब्ध हैं। CAIT देश भर के कई शहरों में खास ‘स्वदेशी मेले’ आयोजित कर रहा है, जहाँ महिला उद्यमियों, स्वयं-सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई राखियाँ और दूसरे उत्पाद बेचे जाएँगे।
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