झारखंड की Politics को समझना असान तो नहीं पर आज पूरा सच्च जानने की कोशिश करेगें और झारखंड की राजनितिक गलियारों में घुमते हुए इसका इतिहास जानने की कोशिश करेंगें। झारखंड की Politics को लेकर कई सारे छोटे – छोटे तथ्य मिलते है। जीसमें एक ये भी कहा जाता है कि वास्तविक में झारखंड की Politics की शुरुआत अलग राज्य के आंदोलन और छोटानागपुर उन्नति समाज से हुई।आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के अधिकारों और एक पृथक पहचान की राजनीतिक मांग 1928 में साइमन कमीशन के सामने रखी गई थी।

झारखंड की Politics में एक अलग आदिवासी देश की मांग 20वीं सदी की शुरुआत से चली आ रही है,जब शिक्षित आदिवासी नेताओं और ईसाई मिशनरियों ने आदिवासी आबादी की चिंताओं को दूर करने के लिए सामाजिक सुधार की पहल की और राजनीतिक संगठन स्थापित करना शुरू किया। ऐसा ही एक शुरुआती संगठन था ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ जिसने आदिवासी अधिकारों और सामाजिक विकास की वकालत की। 1928 में छोटानागपुर उन्नति समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने साइमन कमीशन को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें झारखंड क्षेत्र के लिए एक अलग देश बनाने की मांग की गई थी।
अगर हम बात करें 1930 के दशक की कई सारे आदिवासी संगठनों जिनमें ‘छोटानागपुर किसान सभा’ जैसे किसान समूह साथ ही धार्मिक और जाति-विशिष्ट निकाय शामिल थे ,और आदिवासी संगठनों अपनी सामाजिक-आर्थिक शिकायतों को उठाने के लिए एकजुट होकर काम किया। इन शिकायतों में भूमि अधिकार, जमींदारों द्वारा शोषण और सामाजिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने जैसे मुद्दे शामिल थे। धीरे-धीरे ये अलग-अलग शिकायतें मिलकर एक व्यापक ‘आदिवासी पहचान आंदोलन’ का रूप ले लिया। झारखंड Politics की इतिहास ने एक मोड़ लिया और 1938 में अलग-अलग संगठनों ने मिलकर एक अधिक समावेशी और व्यापक संस्था का गठन किया। जिसे ‘छोटानागपुर-संथाल परगना आदिवासी सभा’ के नाम से जाना गया। 1939 तक, यह संगठन विकसित होकर ‘आदिवासी महासभा’ बन गया, जिसके बैनर तले एक अलग क्षेत्रीय पहचान की मांग और भी अधिक स्पष्ट और मुखर हो गई।
पार्टीयों का उदय-
लेकिन इस बीच 1949 में पहली राजनीतिक पार्टी का गठन किया गया जिसका नाम झारखंड पार्टी रखा गया। मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने 5 मार्च 1949 को इस पार्टी की स्थापना की यह राज्य की पहली बड़ी राजनीतिक पार्टी थी जिसने 1952 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया।
और दुसरी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा JMM का उदय 1974 में किया गया है,फरवरी 1973 को विनोद बिहारी महतो शिबू सोरेन और ए.के. रॉय ने मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। इस पार्टी ने आदिवासी समाज में क्रांती लाने का काम किया इस पार्टी ने आदिवासी के लिए दुसरे प्रांत के मांग को एक जन -आंदोलन का मोड़ दे दिया ।
झारखंड की Politics धीरे – धीरे तब लोगों को उलझाने लगी जब 2000 में विभाजन का किस्सा लोगों को समझ मेंआने लगा जब 1995 में जब झारखंड को धीरे – धीरे पहचान मिलने लगी जब राज्य विधान के तहत झारखंड क्षेत्र स्वायत्त परिषद के गठन के साथ आंशिक सफलता मिली।
और अब 2000 की आग –
2000 में झारखंड का विभाजन आसान नहीं था।क्यों की जब 2000 में बिहार से झारंखड अलग हो रहा था। तब बहुत सारे नेताओं ने इसका सरेआम विरोध किया वही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का कहना था कुछ हो जाए हम झारंखड का विभाजन नहीं होने देंगें । जबकी राजद पार्टी से बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थी।
झारंखड ने अपने विभाजन के लिए लगातार संघर्ष करता रहा इसके बाद बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000, भारत की संसद द्वारा वर्ष 2000 में पारित एक कानून था। लोकसभा और राज्यसभा ने इस विधेयक को 2 अगस्त और 11 अगस्त को पारित किया और यह अधिनियम 15 नवंबर, 2000 को लागू हुआ। जिसके परिणामस्वरूप बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य का गठन हुआ।यह कानून प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार द्वारा अपने चुनावी वादों में से एक को पूरा करने के लिए पेश किया गया था।
झारंखड 15 नवंबर 2000 को भारतीय संसद द्वारा बिहार पुनर्गठन अधिनियम पारित किए जाने के बाद झारखंड नामक नए राज्य का आधिकारिक तौर पर गठन किया गया जिसमें दक्षिणी बिहार से अलग किए गए 18 जिले शामिल थे लेकिन फिलहाल झांरखड में 24 जीले हो चूके है । इस तारीख का प्रतीकात्मक महत्व है क्योंकि यह आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती के दिन पड़ती है।
इसने आदिवासी-बहुल क्षेत्रों को कुछ स्थानीय मामलों कृषि, ग्रामीण स्वास्थ्य, सार्वजनिक कार्य और खनिज विनियमन के संबंध में सीमित स्वायत्तता प्रदान की जिसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। 1997 तक अविभाजित बिहार राज्य विधानसभा ने एक अलग राज्य के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया जो आज भी एक बड़ी जीत मानी जाती है ।
इसके बाद झांरखड में अपना पहला विधानसभा चुनाव 2005 में हुआ जिसके बाद विभाजन से पहले स्वतंत्र चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा होने के कारण किसी भी एक पार्टी या चुनाव-पूर्व गठबंधन को बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। भारतीय जनता पार्टी BJP 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरी। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 17 सीटें हासिल की जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थी।
धीरे- धीरे झांरखंड में राजनितिक बदलाव आया तो सरकारें बनी प्रकार से शुरू हुई –
1. बाबूलाल मरांडी 15 Nov 2000 – 17 Mar 2003 भारतीय जनता पार्टी (BJP)
2. अर्जुन मुंडा 18 Mar 2003 – 02 Mar 2005 भारतीय जनता पार्टी (BJP)
3. शिबू सोरेन 02 Mar 2005 – 12 Mar 2005 झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
4. अर्जुन मुंडा 12 Mar 2005 – 14 Sep 2006 भारतीय जनता पार्टी (BJP)
5. मधु कोड़ा 14 Sep 2006 – 23 Aug 2008 निर्दलीय (UPA समर्थित)
6. शिबू सोरेन 27 Aug 2008 – 18 Jan 2009 झारखंड मुक्ति मोर्चा, (JMM) राष्ट्रपति शासन 19 Jan 2009 – 29 Dec 2009 –
7. शिबू सोरेन 30 Dec 2009 – 31 May 2010 झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
8. अर्जुन मुंडा 11 Sep 2010 – 18 Jan 2013 भारतीय जनता पार्टी , (BJP) राष्ट्रपति शासन 18 Jan 2013 – 12 Jul 2013 –
9. हेमंत सोरेन 13 Jul 2013 – 28 Dec 2014 झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
10. रघुबर दास 28 Dec 2014 – 29 Dec 2019 भारतीय जनता पार्टी (BJP)
11. हेमंत सोरेन 29 Dec 2019 – 02 Feb 2024 झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
12. चम्पाई सोरेन 02 Feb 2024 – 07 Jul 2024 झारखंड मुक्ति मोर्चा (JM
झांरखड में पहला राज्यपाल प्रभात कुमार हुए और पहला मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी हुए।और आज झांरखड की राजनिति बीजेपी, कांग्रेस और जेएमएम के आगे – पीछे घुमती रहती है ।
READ ALSO: SIR को लेकर Jharkhand में राजनितिक महौल गरमाई : अगले महीने होगी SIR की औपचारिक शुरुआत




