लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत शनिवार को क्षेत्र भ्रमण के दौरान उस समय बच्चों के बीच पहुंच गए, जब उनकी नजर सड़क किनारे खेल रहे आदिवासी बच्चों की टोली पर पड़ी। बच्चों को खेलता देख सांसद खुद को उनसे मिलने से रोक नहीं पाए और सीधे उनके बीच पहुंच गए। खास बात यह रही कि उन्होंने बच्चों से बातचीत के लिए किसी औपचारिकता की परवाह नहीं की और धूल-मिट्टी में ही उनके साथ बैठकर काफी देर तक संवाद किया।
बच्चों के बीच पहुंचते ही सांसद का सहज और आत्मीय अंदाज देखने को मिला। उन्होंने एक-एक बच्चे से उसका नाम, कक्षा और स्कूल के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल जाने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। सांसद ने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन को बदलने और समाज को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी ताकत है।
सुखदेव भगत ने बच्चों से कहा कि आज वे जिस परिस्थिति में हैं, वह उनके भविष्य की सीमा तय नहीं करती। अगर वे मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करेंगे तो आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या अधिकारी बन सकते हैं। उन्होंने बच्चों को अपने माता-पिता और गांव का नाम रोशन करने का संकल्प लेने के लिए भी प्रेरित किया।
बच्चों को समझाया मेहनत और अनुशासन का महत्व
सांसद ने बच्चों से बातचीत के दौरान शिक्षा के साथ-साथ ईमानदारी, मेहनत और अनुशासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है।
उन्होंने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल जाने, शिक्षकों का सम्मान करने और पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने की सलाह दी। सांसद ने कहा कि छोटी उम्र में अच्छी आदतें और अनुशासन भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बच्चों के साथ हंसी-मजाक भी किया
सांसद और बच्चों के बीच बातचीत का माहौल पूरी तरह सहज और आत्मीय रहा। कुछ ही देर में औपचारिक बातचीत हंसी-मजाक में बदल गई। सांसद ने बच्चों की बातें सुनीं और उनकी अठखेलियों में भी शामिल हुए। बच्चों के साथ उनका यह सहज व्यवहार आसपास मौजूद ग्रामीणों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया।
ग्रामीणों ने सांसद को बच्चों के बीच इस तरह घुलते-मिलते देखा तो वहां मौजूद लोगों के बीच भी सकारात्मक माहौल बना। सांसद ने बच्चों के साथ समय बिताकर यह संदेश देने की कोशिश की कि जनप्रतिनिधियों का जुड़ाव केवल राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के बच्चों और युवाओं के भविष्य से भी होना चाहिए।
‘शिक्षा ही गरीबी से बाहर निकलने का सबसे मजबूत माध्यम’
सुखदेव भगत ने कहा कि बच्चों की आंखों में दिखाई देने वाले सपने ही उनके संकल्प की ताकत हैं। उन्होंने कहा कि उनका जीवन भी शिक्षा से शुरू हुआ है और वह अच्छी तरह जानते हैं कि शिक्षा किस तरह किसी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकती है।
उन्होंने कहा कि गरीबी से बाहर निकलने और जीवन में बेहतर अवसर हासिल करने का सबसे मजबूत माध्यम शिक्षा है। यदि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें तो वे अपनी प्रतिभा के बल पर किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं।
बच्चों के भविष्य को बताया क्षेत्र के विकास की कुंजी
सांसद ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर मिलें। ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले बच्चों के सपनों को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए, जितना शहरों के बच्चों के सपनों को मिलता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और जनप्रतिनिधियों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें उचित अवसर और मार्गदर्शन देने की है।
सांसद सुखदेव भगत का बच्चों के बीच बैठकर बातचीत करने और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का यह अंदाज क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। इस दौरान उन्होंने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और मेहनत, ईमानदारी तथा शिक्षा को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
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