पलामू जिले के तरहसी प्रखंड की सोनपुरा पंचायत से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डोभा निर्माण का कार्य पूरा किए बिना ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई। मामले में पंचायत प्रतिनिधियों और मनरेगा से जुड़े कई अधिकारियों एवं कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

सिलदिलिया कला गांव निवासी निराला कुमार सिंह ने उपायुक्त पलामू को दिए आवेदन में बताया है कि उनके पिता मटुकधारी सिंह के नाम पर मनरेगा के तहत 60×60×10 फीट का डोभा स्वीकृत किया गया था। शिकायत के अनुसार, योजना की शुरुआत में केवल दो मजदूरों से सीमित कार्य कराया गया, जिसके एवज में 388 रुपये का भुगतान किया गया। इसके बाद निर्माण कार्य पूरी तरह बंद हो गया और डोभा का निर्माण अधूरा ही रह गया।
आरोप है कि कार्य बंद होने के बावजूद वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कई मस्टर रोल तैयार कर बिना किसी वास्तविक निर्माण कार्य के लगभग 87,981 रुपये की निकासी कर ली गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि स्थल पर डोभा का निर्माण नहीं हुआ, जबकि सरकारी अभिलेखों में कार्य पूर्ण होने और मजदूरी भुगतान का उल्लेख किया गया है।
शिकायत में पंचायत की मुखिया, रोजगार सेवक, जूनियर इंजीनियर, पंचायत सचिव तथा प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ) पर कथित मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल तैयार करने और बिचौलियों के माध्यम से राशि निकालने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि जिन मजदूरों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, उनमें से कई ने डोभा निर्माण में काम करने से इनकार किया है। शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित मजदूरों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी तक नहीं थी कि उनके खातों में राशि आई थी और कथित रूप से उनके खातों से पैसे भी निकाल लिए गए।
निराला कुमार सिंह ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा अधूरे पड़े डोभा निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि शिकायत के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रशासन को उपलब्ध करा दिए गए हैं।
मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और जल संरक्षण जैसी आधारभूत योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है। ऐसे में यदि किसी योजना में फर्जी मस्टर रोल, बिना कार्य भुगतान या वित्तीय गड़बड़ी जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग होता है बल्कि योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
हालांकि, इस मामले में अभी तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मनरेगा योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला साबित हो सकता है। अब स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों की नजर जिला प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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