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पश्चिम एशिया युद्ध की कड़वाहट के बीच ‘आम की मिठास’ रामगढ़ से लंदन तक पहुंचा

On: June 12, 2026 3:43 PM
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पश्युचिम एशिया युद्ध की कड़वाहट के बीच ‘आम की मिठास’ रामगढ़ से लंदन तक पहुंचा
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रामगढ़ के किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हुआ आम की पैदावार। मिडिल ईस्ट के तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच झारखंड के आम की डिमांड दुनियाभर में बनी हुई  है। झारखंड के रामगढ़ जिले से आम का एक्सपोर्ट धरल्ले से चल रहा है।

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जब दुनिया का बड़ा हिस्सा युद्ध, तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की खबरों से घिरा हुआ है तब झारखंड के रामगढ़ जिले से एक ऐसी खबर आई है जो उम्मीद मेहनत और सफलता की नई कहानी लिख रही है।

मिडिल ईस्ट के तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच रामगढ़ के किसानों के बागानों में उगे आम अब अपनी मिठास के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान बना रहे हैं।

यह केवल आम की एक खेप का निर्यात नहीं है, बल्कि झारखंड के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐसा मील का पत्थर है  जो आने वाले वर्षों में किसानों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकता है। स्थानीय मंडियों तक सीमित रहने वाला रामगढ़ का आम अब ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के बाजारों में पहुंच रहा है।

रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज ने जिले से आम की दूसरी खेप को यूके के लिए रवाना किया। इस खेप में लगभग दो टन यानी 2000 किलोग्राम आम शामिल हैं। इससे पहले 4 जून को चार टन यानी 4000 किलोग्राम आम दुबई के लिए भेजे गए थे। लगातार हो रहे इस निर्यात ने साबित कर दिया है कि झारखंड के किसानों की मेहनत अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रही है।

पिछले कुछ वर्षों से रामगढ़ जिले में बागवानी और आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया। आधुनिक तकनीकों, बेहतर देखभाल और प्रशासनिक सहयोग का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जिले में वर्तमान में 250 से अधिक आम के बागान हैं और इस सीजन में 100 टन से अधिक उत्पादन होने का अनुमान है। गोला, दुलमी और मांडू प्रखंड के किसानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल रहा है। पहले जो आम स्थानीय बाजारों में अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिकते थे, वही अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर मूल्य प्राप्त कर रहे हैं। पाउंड और दिरहम जैसी मजबूत विदेशी मुद्राओं से मिलने वाली आय किसानों की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती दे रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।

रामगढ़ के इन आमों को ‘आम्रपाली’ ब्रांड नाम से विदेशों में भेजा जा रहा है। एक निजी कंपनी किसानों से सीधे खरीद कर निर्यात प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। इससे किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा और उन्हें सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

यह सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की एक प्रेरणादायक तस्वीर भी है। युद्ध और वैश्विक तनाव के दौर में रामगढ़ के किसानों की यह उपलब्धि बताती है कि मेहनत, गुणवत्ता और सही मार्गदर्शन के दम पर भारतीय कृषि विश्व बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकती है।

झारखंड की धरती पर उगा यह आम अब केवल एक फल नहीं, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और प्रदेश की बढ़ती कृषि क्षमता का प्रतीक बन गया है। ब्रिटेन और यूएई तक पहुंच रही इसकी मिठास निश्चित रूप से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी और मधुर बनाएगी।

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