झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मतदाता सूची के दस्तावेज सत्यापन के दौरान तीन ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जिनकी पहचान अफगानिस्तान के नागरिकों के रूप में हुई है। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने तीनों नामों को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
एक ही बूथ की मतदाता सूची में दर्ज थे तीनों नाम
मामला जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 286 से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां मतदाता सूची में तीन लोगों के नाम दर्ज पाए गए। SIR के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में इन नामों से जुड़े कागजात में विसंगतियां सामने आईं।
इसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। दस्तावेजों की जांच और पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी के सत्यापन के बाद तीनों के अफगान नागरिक होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
दस्तावेजों के सत्यापन के बाद खुला मामला
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा था। इसी क्रम में इन तीन लोगों के दस्तावेजों की जांच के दौरान उनकी नागरिकता को लेकर सवाल उठे।
निर्वाचन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि विदेशी नागरिकों के नाम भारतीय मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नाम दर्ज कराने में किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका तो नहीं थी।
तीनों नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि किसी विदेशी नागरिक का भारतीय मतदाता सूची में नाम शामिल होना नियमों के खिलाफ है। तीनों नामों को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि इन लोगों के नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुए और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। यदि किसी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
DC और SSP को जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन तीनों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने के पीछे किसी तरह की लापरवाही, फर्जी दस्तावेज या सुनियोजित प्रयास तो नहीं था।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इन लोगों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था और संबंधित प्रक्रिया में किन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका रही।
मामले पर झारखंड में सियासत तेज
तीन अफगान नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सामने आने के बाद झारखंड में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी ने मामले को लेकर राज्य सरकार और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी का कहना है कि SIR के दौरान विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सामने आना गंभीर विषय है और इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए। पार्टी ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं झामुमो और कांग्रेस ने केंद्र सरकार तथा केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी व्यवस्थाओं में केंद्रीय स्तर की एजेंसियों की भी भूमिका होती है। ऐसे में पूरे मामले की जांच सभी संबंधित स्तरों पर होनी चाहिए।
क्या दूसरे जिलों में भी सामने आएंगे ऐसे मामले?

जमशेदपुर में मामला सामने आने के बाद अब मतदाता सूची में दर्ज नामों और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर निगरानी बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक दलों की ओर से राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसे मामलों की जांच की मांग की जा रही है।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के लिए दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। किसी भी विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में पाए जाने पर उसे नियमानुसार हटाया जाएगा और यदि जांच में किसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने के मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि उनके नाम मतदाता सूची में किस तरह शामिल हुए और इसके पीछे किसी व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।









