झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के डुमरी विधायक जयराम महतो ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की शिकायत करते हुए ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक जेपीएससी की आगामी परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग की।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में जयराम महतो ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कई अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका दावा था कि एक अभ्यर्थी ने ओएमआर शीट में केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए इसके बावजूद उसे अगले चरण के लिए सफल घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि यह तथ्य सही है तो परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिणाम जारी होने के समय आयोग के कई सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे जिससे परिणाम की वैधता और पूरी चयन प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है। जयराम महतो ने कहा कि यदि आयोग के सदस्य स्वयं परिणाम पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं और इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं। जयराम महतो ने मामले की गहन जांच कराने की मांग की।
जेएलकेएम प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि जिस कंपनी को जेपीएससी परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई, वह उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड है। ऐसे में उसी कंपनी को झारखंड में परीक्षा संचालन का दायित्व देना कई सवाल खड़े करता है और परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न करता है।
जयराम महतो ने बताया कि सोमवार रात उनकी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और इस पर संज्ञान लिया गया है। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को राज्यपाल से मिलकर भी मामले की विस्तृत जानकारी दी और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने भी बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से मिली है। जयराम महतो ने कहा कि अभ्यर्थियों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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