लातेहार जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए भोजन पकाने और परोसने ह के लिए सप्लाई किए गए बर्तनों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बेहद निम्न गुणवत्ता के बर्तनों की आपूर्ति की गई है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार जिले के 962 आंगनबाड़ी केंद्रों में बर्तन उपलब्ध कराने के लिए डीएमएफटी फंड से जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत ग्लास, थाली, कड़ाही, जग, कटोरा, कुकर समेत अन्य सामानों की आपूर्ति की गई। बर्तन सप्लाई का जिम्मा वाणी इंटरप्राइजेज को दिया गया था।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि सप्लाई किए गए कई बर्तनों की गुणवत्ता बेहद खराब है। कुछ आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बताया कि बर्तन इतने पतले और कमजोर हैं कि उनमें भोजन बनाना मुश्किल है। कई केंद्रों में इन बर्तनों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने के बाद कहा कि सप्लाई किए गए बर्तनों की गुणवत्ता सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता हुई हो सकती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कई केंद्रों में बच्चों को घर से थाली लानी पड़ रही है, क्योंकि उपलब्ध कराए गए बर्तन उपयोग योग्य नहीं हैं। मामले को जिला परिषद की बैठक में उठाने और राज्य सरकार को पत्र लिखने की बात भी उन्होंने कही।
आंगनबाड़ी सेविका निशा राज ने बताया कि उपलब्ध कराए गए कई बर्तनों का उपयोग करना कठिन है। उनके अनुसार कुछ बर्तन इतने पतले हैं कि उनमें भोजन बनाते समय जलने की समस्या होती है।
वहीं, इस पूरे मामले पर लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा कि उन्हें फिलहाल टेंडर की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन मामले की जांच कराई जाएगी।
अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।





