जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलनरत छात्रों और झारखंड सरकार के बीच शुक्रवार को हुई पहली दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। राजधानी रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। ऐसे में आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
बैठक में सरकार की ओर से मंत्री संजय प्रसाद यादव, दीपिका सिंह पांडेय, चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार तथा स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह मौजूद रहे। वहीं जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों का पक्ष सरकार के समक्ष रखा।
छात्र डेलिगेशन में रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल हुए यही प्रतिनिधि बैठक में छात्रों की ओर से अपनी मांगों और आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों को सरकार के सामने रखा।
छात्रों ने जताई नाराजगी
वार्ता के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे सरकार से स्पष्ट और लिखित आश्वासन की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन बैठक में ऐसा कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। उनका कहना था कि केवल विचार-विमर्श से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध परीक्षाएं और आयोगों में आवश्यक सुधार की मांग कर रहे हैं। इन मुद्दों पर सरकार की ओर से स्पष्ट रोडमैप सामने आना चाहिए।
सरकार ने कहा, मांगों पर हो रहा है विचार
वार्ता के बाद उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार किया जा रहा है और सरकार सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संवाद के माध्यम से आगे का रास्ता निकलेगा।
हालांकि, सरकार की ओर से किसी समय-सीमा या ठोस घोषणा का अभाव छात्रों की नाराजगी का कारण बना।
आगे क्या?
पहले दौर की वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद अब सभी की निगाहें सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं। फिलहाल छात्र अपने आंदोलन को जारी रखने के फैसले पर कायम हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती है और क्या आगामी वार्ता किसी सकारात्मक परिणाम तक पहुंच पाती है।
जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े मुद्दे लंबे समय से झारखंड के युवाओं के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में इस विवाद का समाधान न केवल हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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